विश्व की सबसे बड़ी परशुराम प्रतिमा होगी स्थापित, पूरे देश से ब्राह्मण समाज करेगा सहयोग


मंदिर निर्माण ट्रस्ट का गठन, ट्रस्ट ब्राह्मणों को करेगा एकजुट, बढ़ाएगा राजनीतिक ताकत

कानपुर देहात में भगवान श्री परशुराम जी का भव्य मंदिर बनाया जाएगा, जिसके लिए 7 बीघे जमीन दान दी गयी है। कानपुर देहात स्थित इसी जमीन पर जल्द ही मंदिर निर्माण शुरू किया जाएगा और भगवान परशुराम की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी, 25 करोड़ की लागत से इस प्रतिमा व मंदिर का निर्माण होगा इसके निर्माण में भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकारों का सहयोग लिया जाएगा। भगवान परशुराम की दुनियाभर में स्थापित की गयी प्रतिमाओँ में ये मूर्ति सबसे बड़ी होगी। इसके साथ ही बनने वाले मंदिर में भगवान परशुराम अनुसंधान केन्द्र और विश्व की सबसे बड़ी वैदिक पाठशाला का भी निर्माण होगा जिसमे सनातन धर्म व सनातन संस्कृत के व्यावहारिक पहलुओ का भी प्रशिक्षण किया जाएगा।

मंदिर निर्माण और मूर्ति स्थापना के लिए विधायक प्रतिभा शुक्ला की अध्यक्षता में ट्रस्ट का गठन किया जा चुका है। ट्रस्ट का संरक्षक पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी को बनाया गया है। मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के प्रबंधक और संरक्षक ने जो जमीन दान की है उसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए बतायी जा रही है। ट्रस्ट में अभी ब्राह्मण समाज के लगभग 20 हजार सदस्य सक्रिय हैं। जिसमें ब्राह्मण समाज के अवकाश प्राप्त जज, चार्टेड एकाउन्टेंट, इंजीनियर, अधिवक्ता, व्यापारी, अध्यापक और लेखकों के साथ प्रबुद्धजन सम्मिलित हैं। ट्रस्ट जल्द ही कानपुर देहात में भगवान श्री परशुराम के मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करेगा। जिसके लिए पूरे देश से ब्राह्मण समाज को एकजुट करते हुए सहयोग लिया जाएगा। ट्रस्ट में सदस्यों की संख्या बढ़ाते हुए ब्राह्मण समाज से 2 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है, सदस्यता के लिए मोबाइल नंबर.......... भी जारी किया गया है जिसपर मिसकॉल करके ट्रस्ट का सदस्य बना जा सकता है।

भगवान श्री परशुराम मंदिर निर्माण ट्रस्ट मूर्ति स्थापना, मंदिर निर्माण के अलावा ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का काम भी करेगा और समाज को राजनीतिक रूप से और अधिक मजबूत भी किया जाएगा। इसे लेकर ट्रस्ट की बैठक आयोजित की गयी। ट्रस्ट के लोगों का मानना है कि भगवान परशुराम और चाणक्य की नीतियों पर चलते हुए और आदर्श मानते हुए ही ब्राह्मण समाज को और अधिक मजबूती देना संभव हो सकेगा। इसीलिये अब समय आ गया है कि समाज को दोबारा से एकजुट किया जाए। ट्रस्ट के लोगों का ये भी मानना है कि अभी तक तमाम राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण समाज का सिर्फ़ इस्तेमाल किया और सत्ता हासिल करने की सीढ़ी बनाया गया। ट्रस्ट की बैठक में भगवान परशुराम की एक कथा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि सारस्वत ब्राह्मणों का एक दल वर्तमान महाराष्ट्र और केरल के पश्चिमी तट पर रहते थे। समुद्र उनकी जमीन खा रहा था और मनाने पर भी नहीं मान रहा था। वे अपनी याचना लेकर परशुराम के पास आए। परशुराम ने फरसा उठाया और समुद्र को मारने दौड़ पड़े। उसे पीछे धकेला और जमीन खाली कराई। इसी तरह अब एक बार फिर समय आ गया है कि कि राजनीतिक जमीन खाने वालों के परशुराम के अनुयायी अपना अधिकार हासिल करें। इसके लिए ब्राह्मण समाज को भगवान परशुराम के तप, धैर्य और पराक्रम को अंगीकृत करना होगा और चाणक्य की नीतियों पर चलना होगा। 

ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बताया कि कानपुर देहात में जल्द ही मंदिर निर्माण शुरू किया जा सकता है। इसके लिए मंदिर का मॉडल भी तैयार कराया जा चुका है और उसी की तर्ज पर ये विशाल मंदिर निर्मित होगा। उन्होंने बताया कि कालांतर में भगवान श्री परशुराम का ये मंदिर दुनियाभर के बुद्धिजीवियों के लिए महान केन्द्र बनेगा जहां से जारी जनहित संदेश लोगों में समाज व राष्ट्र के प्रति त्याग भावना को विकसित करेंगे। साथ ही प्रेम और सौहार्द का वातावरण तैयार करने में मदद की जाएगी।  ट्रस्ट के संरक्षक पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी ने कहा कि एक मजबूत धर्म ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसलिए आज के समय की आवश्यकता है कि हम सब एकजुट होकर रहें और अपने धर्म का अध्यन और प्रचार प्रसार कर इस पर निष्ठा साबित करें।


 

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